What is WHO in hindi - डब्ल्यूएचओ क्या है?

डब्ल्यूएचओ क्या है - WHO kya hai - what is WHO?

साल 2020 में कोविड-19, हैंड वॉश,सेनीटाइजर और सोशल डिस्टेंसिंग के अलावा जो नाम बहुत बार लिया गया वह नाम था WHO  जिसे किसी पहचान की जरूर नहीं है।

और पेंडमिक के दौर में डब्ल्यूएचओ (WHO)  की गाइडलाइंस की बदौलत ही पूरी दुनिया को इस बीमारी से बचाव के तरीके टाइम टाइम पर पता चलते रहे।

तो ऐसे मे वर्ल्ड हेल्थ को लेकर डब्ल्यूएचओ के कंसर्न से आप इस आर्गेनाइजेशन के बारे मे तो जरूर जान गये होगे की यह ऑर्गेनाइजेशन बेटर हेल्प के लिए काम करती है।

लेकिन WHO का area और vision बहुत ही ब्रॉड है इसलिए क्यों ना हम आज डब्ल्यूएचओ के बारे में ही जान ले तो चलिए दोस्तों आज WHO के बारे में हम डिटेल में बात करते हैं।

इसलिए क्यों न आज हम डब्‍ल्‍यूएचओ के बारे में ही जान लें, तो चलिए दोस्तों आज हम डब्‍ल्‍यूएचओ के बारे में डिटेल में बात करते हैं।


(1) WHO की फुलफॉर्म क्या है WHO ki full form?

डब्‍ल्‍यूएचओ (WHO) की फुलफॉर्म है ‘World Health Organization' जिसे हिन्दी में विश्व स्वास्थ्य संगठन कहा जाता है।

(2) WHO क्या है और ये कैसे काम करता है?

World Health Organization (WHO), United Nations की एक ऐसी स्पेशलाइज्ड एजेंसी है जो पूरी दुनिया के बेटर हेल्थ के लिए काम करती है। WHO के डायरेक्टर जनरल ‘Tedros Adhanom Ghebreyesus’ हैं।

डब्‍ल्‍यूएचओ का लक्ष्य है कि दुनिया के हर व्यक्ति को बेस्ट पॉसिबल हेल्थ मिल सके और इसके लिए डब्‍ल्‍यूएचओ लगतार काम करता रहता है। इस आर्गेनाइजेशन के 194 मेंबर स्टेट्स हैं।

WHO का Headquarters ‘Geneva, Switzerland’ और 6 सेमी ऑटोनोमस रीजनल ऑफिसेस अफ्रीका, अमेरिका, साउथ ईस्ट एशिया, यूरोप, ईस्टर्न मेडिटेरियन और वेस्टर्न पैसिफिक के लिए है। इनके अलावा, WHO के 150 फील्ड ऑफिसेस वर्ल्ड वाइड फैले हुए हैं।

डब्‍ल्‍यूएचओ के स्टाफ में 7,000 से भी ज्यादा लोग हैं, जो इसके 150 ऑफिसेस, टेरिटरीज, एरियाज, रीजनल ऑफिसेस, मलेशिया में स्तिथ ग्लोबल सर्विस सेंटर और जिनेवा हेडक्वार्टर में वर्क करते हैं। इसके स्टाफ में मेडिकल डॉक्टर्स के अलावा, पब्लिक हेल्थ स्पेसलिस्ट, साइंटिस्ट्स, एपिडेमीओलॉजिस्ट्स भी शामिल हैं।

WHO, 07 अप्रैल 1948 को स्टैब्लिश हुआ था और आपको याद हो तो इसी दिन हम World Health Day भी मनाते हैं। डब्‍ल्‍यूएचओ ना केवल ह्यूमन हेल्थ को प्रोमोट करता है, बल्कि पब्लिक हेल्थ रिस्क को मॉनिटर करना, हेल्थ एमर्जेन्सीज़ में रेस्पॉन्स देना और यूनिवर्सल हेल्थ केयर को सपोर्ट करने जैसे इम्पोर्टेन्ट रिस्पॉन्सिबिलिटीज़ को भी पूरा करता है।

WHO, रिसर्च के लिए भी इंटरनेशनल स्टैंडर्ड सेट करता है और रिसर्च प्रायोरिटीज को आइडेंटिफाई करना और रिसर्च को कंडक्ट करना और प्रोमोट करना भी इसकी रिस्पॉन्सिबिलिटीज़ में शामिल क्योंकि हर व्यक्ति तक हेल्थ पहुँचाने के लिए हेल्थ रिलेटेड रिसर्च भी बहुत ही जरुरी होती है।

डब्‍ल्‍यूएचओ ने स्मॉलपॉक्स (चेचक) को खत्म करने, पोलियो को दूर करने और एबोला की वैक्सीन बनाने जैसे बहुत से अचीवमेंट्स अपने नाम किये हैं और प्लेग और जीका वायरस से भी निपटने में WHO का बहुत बड़ा हाँथ रहा है।

Yellow Fever Vaccination, यमन और नाइजीरिया क्राइसिस में बच्चों को पोलियो वैक्सीन लगाना और सोमालिया क्राइसिस में हैजा (Cholera) को कंट्रोल करना, WHO के बहुत से अचीवमेंट्स में से कुछ हैं।

इस आर्गेनाइजेशन की प्रायोरिटी में HIV AIDS, Ebola, Malaria, Tuberculosis जैसे कम्युनिकेबल डिजीजेस और हार्ट डिजीज, कैंसर जैसी नॉन कम्युनिकेबल डिजीजेस भी रहती हैं ताकि जल्द से जल्द इन्हे कंट्रोल में लाया जा सके और मिटाया भी जा सके। इसके अलावा WHO हेअल्थी डाइट, नुट्रिशन और फूड सिक्योरिटी की फील्ड में भी वर्क करता है।

WHO अच्छी हेल्थ के लिए हवा, खाना, पानी, दवा और वैक्सीन, हर चीज की सेफ्टी पर वर्क करता है क्योंकि इन सबसे मिलकर के ही बेहतर सेहत पाई जा सकती है। डब्‍ल्‍यूएचओ के अनुसार हेल्थ का मतलब केवल बीमारी या कमजोरी होने से नहीं है, बल्कि कम्पलीट फिजिकल, मेन्टल और सोशल वैलनेस है।

डब्‍ल्‍यूएचओ को जो फंड्स मिलता है, उसमे वालेंटरी कंट्रीब्यूशन में सबसे ज्यादा फंड आता है, जो मेंबर स्टेट्स के जरिये भी आ सकता है और NGO के जरिये भी। इसके बाद एसेस्ट कंट्रीब्यूशन आते हैं, जिसे मेम्बरशिप फीस कहा जा सकता है। जो हर कंट्री अपनी फाइनेंसियल हेल्थ और पापुलेशन के बेस पर WHO को देती है। सबसे ज्यादा कंट्रीब्यूशन USA का होता है।

(3) इंडिया डब्‍ल्‍यूएचओ का हिस्सा कब बना?

इंडिया, WHO का पार्ट 12 जनवरी 1948 को बना और इंडिया में WHO का हेडक्वार्टर दिल्ली में है। इंडिया में हेल्थ को बेहतर बनाने में डब्‍ल्‍यूएचओ Government of India को ऐसे एरियाज में सपोर्ट कर रहा है, जैसे कि आयुष्मान भारत को इम्प्लीमेंट करना, हेल्थ सेक्टर की परफॉरमेंस को मॉनिटर और इवैल्युएट करना, Maternal और Child Health, Tuberculosis और Hepatitis के लिए अवेलेबल हेल्थ सर्विसेज को इम्प्रूव करना, एयर पोल्युशन सहित एनवायरनमेन्टल हेल्थ को बेहतर करना, मेन्टल हेल्थ को प्रोमोट करना और सुसाइड से बचाव करना, नुट्रिशन और फूड सेफ्टी पर ध्यान देना, रोड सेफी, टोबैको कण्ट्रोल और हेल्थ सेक्टर में इंडिया की लीडरशिप को स्ट्रांग बनाना।

(4) Covid-19 के मामले में WHO की क्या भूमिका रही है?

11 मार्च 2020 को WHO ने Novel Coronavirus Disease (Covid-19) को एक महामारी घोषित किया था और देशों से तुरंत एक्शन लेने और लोगों की जान बचाने के लिए ट्रांसमिशन को डिटेक्ट करने और उसे फैलने से रोकने का मैसेज भी दिया था।

WHO ने अपने Open WHO Platform के जरिये मिलियन्स हेल्थ केयर वर्कर्स को ट्रेंड भी किया और दुनिया के लीडिंग रिसर्चर को एक साथ लाकर वैक्सीन Research का काम शुरू किया। WHO ने देशों की लगातार मदद की ताकि वो Covid-19 के खतरे को रोक सकें और इससे बचाव की तैयारी कर सकें।

डब्‍ल्‍यूएचओ ही वो Health एजेंसी है, जिसने इस पैंडेमिक पर पैनिक क्रिएट करने वाले मिथ को तोड़ा और एकदम सही Information देकर दुनिया को Miss Guide होने से बचाया।

डब्‍ल्‍यूएचओ ने 133 कन्ट्रीज के हेल्थ वर्कर्स तक 4 मिलियन से भी ज्यादा Personal प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट्स पहुंचाये हैं और सबको बेहतर हेल्थ प्रोवाइड कराने और पैंडेमिक से बचाव कराने के लिए WHO के प्रयास जारी हैं, जो दुनिया में इस आर्गेनाइजेशन की जरुरत और दुनिया की बेहतर सेहत बनाये रखने में इसके Important कंट्रीब्यूशन को शो करती है।

Conclusion:-

दोस्तों, WHO कितनी Important Organization है और ये किस तरीके से काम करती है? इस बारे में आपको इस आर्टिकल में पूरी जानकारी मिल गई होगी। और डब्‍ल्‍यूएचओ की हमारी लाइफ में क्या इम्पोर्टेंस है? ये भी आप समझ पाए होंगे यह आर्टिकल आपको कैसा लगा हमे कमेंट मे जरूर बताएं और जानकारी अच्छी लगने पर share जरूर करें।

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