Bhujangasana benefits in hindi: भुजंगासन योगा विधि, लाभ और सावधानियां।

नमस्कार दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम बात करने वाले हैं कि Bhujangasana कैसे कर सकते हैं और इसके क्या क्या लाभ है भुजंगासन को करते समय कौन कौन सी सावधानियां को बरतना आवश्यक है।

Bhujangasana kya hai – भुजंगासन आसन क्या है?

भुजंगासन आसन योगा करने का आसन है और इस आसन को शेषनाग आसन भी कहा जाता है। क्योंकि इस योगा में व्यक्ति के शरीर की स्थिति नाग की तरह होती है।

भुजंगासन आसन में व्यक्ति के शरीर की स्थिति नाग की तरह फन उठाइए वाली होती है।भुजंगासन आसन योगासन के 7 नंबर का आसन है।

भुजंगासन आसन को करने की विधि।

बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो घर पर बैठकर बिना योगा टीचर के भुजंगासन आसन को सीखना चाहते हैं हम आपको स्टेप बाय स्टेप जानकारी देंगे कि आप अपने घर पर रहकर ही भुजंगासन आसन को किन-किन स्टेप के द्वारा कर सकते हैं।

  • सबसे पहले आपको एक योगा चटाई लेनी है और उस जगह चटाई को एक खाली स्थान खुली जगह पर बिछा लेना है।
  • योगा चटाई को बिछाने के बाद जमीन पर पेट के बल लेट जाए और हथेली को कंधे से नीचे की ओर रखें।
  • फिर अपने दोनों पैरों को पीछे की ओर खींचते हुए स्ट्रेट रखें ध्यान रखें दोनों पैर की ओर ज्यादा दूरी नहीं होनी चाहिए।
  • हल्की हल्की सांस लें और शरीर के अगले भाग को हल्के हल्के ऊपर उठाने की कोशिश करें।
  • अपनी कमर पर ज्यादा खिंचाव नहीं देना है लगभग 30 सेकंड की अवस्था में बनी रहे इसके बाद हल्की हल्की सांस छोड़ते हुए पहले वाले अवस्था में आ जाएं।
  • अगर आपका भुजंगासन आसन का प्रथम दिन है तो आप इसे 2 बार से ज्यादा ना करें धीरे-धीरे आप इसकी मात्रा बढ़ाते हैं क्योंकि 1 दिन में ज्यादा भुजंगासन आसन करने से आपकी कमर में दर्द हो सकती है।

Bhujangasana benefits in hindi – भुजंगासन आसन के लाभ – bhujangasana ke fayde।

योगा करने के बहुत सार लाभ प्राप्त होते हैं भारत में प्राचीन काल से ही ऋषि मुनि योगा करके अपने को स्वस्थ रखते थे और भारत में कोविड-19 के समय से योगा को बहुत महत्व दिया जा रहा है जो कि इसके बहुत सारे फायदे हैं। भुजंगासन आसन के फायदे निम्नलिखित हैं:-

पीठ दर्द को समाप्त करने में सहायक।

जो लोग पीठ दर्द की समस्या से परेशान है वे लोग अपने घर पर भुजंगासन आसन कर सकते हैं क्योंकि भुजंगासन आसन करने से पीठ दर्द कम होती है और यह आसन पीठ को मजबूत भी बनाता है।

गले में दर्द में को कम करने में सहायक।

भुजंगासन आसन करने का एक बड़ा फायदा यह भी है इस आसन को करने से गले में खराश और गले में दर्द समाप्त हो जाता है। जिन लोगों को गले दर्द की समस्या है वह इस आसन को कर सकते हैं।

चेस्ट बनाने में सहायक।

जिन बालक और बालिकाओं की चेस्ट ढीली डाली है वे सभी अपनी चेस्ट को मजबूत बनाने के लिए भुजंगासन आसन को अपने दैनिक जीवन में कर सकते हैं।

रीड की हड्डी को मजबूत बनाने में सहायक।

भुजंगासन आसन करने से रीढ़ की हड्डी काफी मजबूत होती है क्योंकि भुजंगासन आसन में पीठ का सबसे ज्यादा प्रयोग होता है। जिन लोगों को रीढ़ की हड्डी की समस्या है वह लोग भुजंगासन आसन को दैनिक जीवन में कर सकते हैं।

इंसुलिन को बढ़ाने में सहायक।

भुजंगासन आसन करने से शरीर में इंसुलिन की मात्रा में वृद्धि होती है जिन लोगों को इंसुलिन की समस्या है वे लोग भुजंगासन आसन को दैनिक जीवन में कर सकते हैं।

मोटापे को कम करने में सहायक।

भुजंगासन आसन करने से मोटापे में कमी आती है क्योंकि यहां पर पूरे शरीर को पेट के बल लेटा कर पूरे शरीर में खिंचाव आता है जिसके कारण शरीर में जमी चर्बी कम हो जाती है। इसलिए जो लोग मोटापे को कम करना चाहते हैं वे लोग अपने दैनिक जीवन में सुबह के वक्त भुजंगासन आसन को कर सकते हैं।

भुजंगासन आसन करते समय सावधानियां।

भुजंगासन आसन को करते समय बहुत सारी सावधानियों को ध्यान में रखना आवश्यक है। बहुत सारे लोग भुजंगासन आसन को पहली बार करते हैं जिसके कारण मेरी बहुत सारी गलतियां कर देते हैं और यह गलतियां नुकसान भी पहुंचा देती है। भुजंगासन आसन को करते समय यह सभी सावधानियां बरतनी आवश्यक है जैसे:-

  1. जब भी भुजंगासन आसन को करते हैं तो अपने शरीर के पिछले हिस्से पर ज्यादा जोर ना दे और पीछे की ओर कभी भी अधिक ना झुके ऐसा करने से आपकी मांसपेशियों में ज्यादा खिंचाव आ जाएगा।
  2. जिन लोगों को हर्निया की बीमारी है उन्हें भुजंगासन आसन को नहीं करना चाहिए।
  3. जिन लोगों का पेट का ऑपरेशन हुआ है उन लोगों को भी भुजंगासन आसन नहीं करना चाहिए।
  4. जिन लोगों की सिर दर्द होती है उन लोगों को भी भुजंगासन आसन को नहीं करना चाहिए।
  5. भुजंगासन आसन को करते समय कभी भी पीठ पर ज्यादा बल नहीं देना चाहिए।

FAQ

भुजंगासन आसन को कितनी देर तक करना चाहिए?

भुजंगासन आसन को करने का अगर आपका प्रथम दिन है तो आप को दो बार से ज्यादा नहीं करना चाहिए 15 दिन के बाद आप भुजंगासन आसन को लगातार करते हैं तो आप भुजंगासन आसन को करने की मात्रा को बढ़ा सकते हैं। स्टेमिना के अनुसार ही भुजंगासन आसन की मात्रा को बढ़ाएं।

भुजंगासन आसन को किस समय करना चाहिए?

भुजंगासन आसन को सुबह के समय करना चाहिए क्योंकि इस समय मनुष्य का पेट एक दम खाली रहता है और दिमाग भी शांत रहता है।
भुजंगासन आसन को हम सुबह के वक्त करना ही उचित रहता है।

भुजंगासन आसन को करने के बाद कोन सा आसन करना चाहिए?

भुजंगासन आसन को करने के बाद आप अपनी इच्छा के अनुसार कोई भी आसन को कर सकते है। भुजंगासन आसन करने के बाद आप ताड़ासन या त्रिकोणासन कर सकते हैं। भुजंगासन आसन को करने के बाद आप कोई भी एक्टिविटी को कर सकते हैं जैसे गेम खेलना या फिर रनिंग करना आदि।

भुजंगासन के प्रकार।

भुजंगासन के प्रकार तीन प्रकार के होते हैं।

तिर्यक भुजंगासन क्या है?

भुजंगासन का ही एक भाग तिर्यक भुजंगासन है।
तिर्यक भुजंगासन में व्यक्ति की तीन प्रकार की होती है।
तिर्यक भुजंगासन में व्यक्ति का मुंह पीछे की ओर रहता है।

पूर्ण भुजंगासन क्या है?

पूर्ण भुजंगासन में पेट के बल दोनों हथेलियों को जमीन में रखकर दोनों हाथों को छाती की ओर पैर के पंजे आपस में मिले हो सांस धीरे धीरे लेकर गर्दन को ऊपर की ओर उठाएं। नाभि का पिछला वाला भाग जमीन पर हो। पूर्ण भुजंगासन के सारे फायदे है जैसे और पेट रोग को कम करने में सहायक और इस फेसबुक को समाप्त करने में सहायक है।

Conclusion

आज के इस लेख में आपने जानकारी प्राप्त की है कि भुजंगासन आसन करने की विधि क्या है और भुजंगासन आसन को करने के क्या-क्या फायदे हैं और क्या क्या सावधानी बरतनी चाहिए। इस आर्टिकल को पढ़कर आप अपने घर पर बैठकर भी बहुत आसानी से भुजंगासन आसन को स्टेप स्टेप बाय स्टेप कर सकते हैं।

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