Vrikshasana Yoga benefits in hindi: वृक्षासन योगा विधि, लाभ और सावधानियां।

Vrikshasana Yoga – वृक्षासन योगा कैसे करें और वृक्षासन के फायदे

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए दैनिक जीवन में अधिकतर व्यक्ति योगासन करते हैं। योगा आसन भी बहुत सारे प्रकार के होते हैं। आज की इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि वृक्षासन करने की कौन-कौन सी विधि है और इसके क्या क्या फायदे आपकी शरीर को मिल सकते हैं।

What is Vrikshasa – वृक्षासन क्या है?

प्राचीन काल से ही भारत में योगा के कई सारे आसन प्रसिद्ध है। व्यक्ति अपनी इच्छा के अनुसार योगा का कोई भी आसन कर सकता है। वृक्ष की तरह वृक्षासन भी है इस आसन में व्यक्ति की पूरी स्थिति वृक्ष की तरह रहती है। जिस तरीके से वृक्ष दिखाई देता है उसी प्रकार वृक्षासन में व्यक्ति आसन करते समय वृक्ष की स्थिति में खड़ा रहता है।

Poses of Vrikshasana Yoga|वृक्षासन करने की विधि?

बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो अपने घर पर बैठकर वृक्षासन करना चाहते हैं हम आपको स्टेप बाय स्टेप बताएंगे कि आप किस तरीके से वृक्षासन को कर सकते हैं। जब भी आप वृक्षासन की शुरुआत करेंगे तो आप अपने पास एक व्यक्ति को अवश्य रखें क्योंकि शुरुआत में व्यक्ति से बहुत सारी गलतियां हो जाती हैं और कई बार तो चोट भी लग जाती है।

  • वृक्षासन करने से पहले एक्सरसाइज कर ले।
  • इसके बाद आप (ताड़ासन) की अवस्था में खड़े हो जाएं।
  • और अपने दाएं घुटने को मोड़ दे ओर बाएं पैर में पंजे के बल खड़े हो जाएं। अपने दाएं पैर को बाएं पैर के ऊपर रखें।
  • अपने बाएं पैर से पूरे शरीर को संतुलित रखें।
  • जब आपका शरीर बैलेंस हो जाएगा तो बाजू को ऊपर की ओर उठाएं और सिर के ऊपर से दोनों हाथ को नमस्कार मुद्रा में मोड़ ले।
  • नमस्कार मुद्रा की स्थिति में बैलेंस बनाना थोड़ा कठिन कारी रहता है लेकिन अगर आप धीरे-धीरे इसकी प्रैक्टिस करेंगे तो आपका बैलेंस बनने लग जाएगा।
  • जब आप नमस्कार मुद्रा में अपना बैलेंस बना लेते हैं तो अपने सिर को दृष्टि उंगलियों के ऊपर फोकस करने का प्रयास करें।
  • शुरुआत में 10 से 20 सेकंड तक इस स्थिति में खड़े रहे।
  • हल्की-हल्की सांस ले।
  • वृक्षासन को दाएं पैर से करने के बाद बाय पैर से करे।
  • शुरुआत में वृक्षासन को केवल 30 सेकंड के लिए ही करें।

Vrikshasana Yoga benefits in hindi : वृक्षासन योगा के फायदे|Vrikshasana yoga ke fayde?

मानव शरीर को स्वस्थ और संतुलित बनाने के लिए
वृक्षासन सबसे अच्छा आसन माना जाता है क्योंकि इस आसन के बहुत सारे फायदे मिलते हैं।

1. शरीर को संतुलित बनाने में सहायक।

वृक्षासन को अगर दैनिक जीवन में रोज कर आ जाए तो जिन लोगों का शरीर असंतुलित होता है वे इस आसन के द्वारा अपने शरीर को पूरी तरीके से संतुलित कर सकते हैं इस आसन को करने से मानव शरीर पूरी तरीके से संतुलित होता है क्योंकि इस आसन में शरीर के पूरी हिस्सों का प्रयोग होता है। जो लोग मोटे हैं उन लोगों को
वृक्षासन दैनिक जीवन में 2 से 3 मिनट जरूर करना चाहिए।

2. टांगों को संतुलित बनाने में सहायक।

वृक्षासन करने से मानव की टांगों पर भी प्रभाव पड़ता है क्योंकि यहां पर एक पैर की एड़ी के बल से खड़ा होना पड़ता है एक टांग को दूसरी टांग पर रखना पड़ता है। इस आसन को करने से टांग मजबूत और संतुलित हो जाती हैं।

3. Vrikshasana साइटिका की समस्या को कम करने में मदद करता है।

vrikshasana गन्ने का सबसे बड़ा बेनिफिट यह है कि इस आसन को करने से साइटिका की समस्या को कम किया जा सकता है क्योंकि साइटिका की समस्या में व्यक्ति के कमर से लेकर पैर में दर्द होती है जब vrikshasana को करते हैं तो पैरों से लेकर कमर तक की एक्सरसाइज होती है।

4. फ्लैट पैर की समस्या को दूर करने में सहायक है।

अगर जिन लोगों का पैर एकदम फ्लैट है उन लोगों को अपने दैनिक जीवन में वृक्षासन को करना चाहिए क्योंकि इस आसन से फ्लैट पैर की समस्या दूर हो जाती है।

5. ध्यान केंद्रित करने में सहायक।

वृक्षासन को गन्ने का सबसे बड़ा बेनिफिट यह है कि इस आसन को करने से व्यक्ति का ध्यान एक जगह केंद्रीकृत हो जाता है क्योंकि जब हम इस आसन को करते हैं तो हमारा ध्यान सामने होता है और इस आसन को करते समय इधर-उधर नहीं देखना पड़ता है।

Precautions:- वृक्षासन को करते समय सावधानियां।

जब भी आप कोई आसन को करते हैं तो उसको करते समय आपको बहुत सारी सावधानियां बरतनी आवश्यक होती है कभी-कभी सावधानी नहीं बरतने से आपको नुकसान भी हो सकता है।

vrikshasana को खाली पेट करें।

vrikshasana को हमेशा सुबह और शाम के वक्त खाली पेट करना चाहिए। खाना खाने के बाद कभी भी इस आसन को नहीं करना चाहिए क्योंकि अगर आप इस आसन को खाना खाने के बाद करेंगे तो आपको पेट दर्द की समस्या से गुजरना पड़ सकता है।

पैर फैक्चर वाले लोग इस आसन को कम करें।

बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं जिनका पैर फैक्चर हुआ है तो उन लोगों को vrikshasana को बहुत कम करना चाहिए और अपने पैरों पर ज्यादा जोर नहीं देना चाहिए।

शरीर को संतुलित करने के बाद ही vrikshasana की मुद्रा को करें।

बहुत सारे लोग शुरुआत में गलती कर देते हैं वे लोग अपने शरीर को संतुलित नहीं करते हैं और सीधा vrikshasana की मुद्रा को करने लगते हैं ऐसा करने से मानव शरीर पर बुरा असर पड़ सकता है और आपको vrikshasana के बेनिफिट नहीं मिल सकते हैं क्योंकि आप इसे संतुलित तौर पर नहीं कर रही है। आप जब भी आप vrikshasana को करते हैं तो सबसे पहले शरीर पर संतुलन बनाना आवश्यक होता है।

माइग्रेन की समस्या वाले vrikshasana को ना करें।

बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं जिन्हें माइग्रेन की समस्या होती है तो उन लोगों को कभी भी vrikshasana को नहीं करना चाहिए।

FAQ

वृक्षासन को कब करना चाहिए?

वृक्षासन को हमेशा सुबह खाली पेट करना चाहिए। इस आसन को करते समय शरीर को हल्का रहना जरूरी होता है क्योंकि सुबह के समय हमारा पेट एकदम खाली रहता है और हम आसानी से वृक्षासन को कर सकते हैं।

वृक्षासन का दूसरा नाम क्या है?

वृक्षासन को ट्री आसन के नाम से भी जाना जाता है। इस आसन को करते समय मानव शरीर की स्थिति एक पेड़ की तरह रहती है।

Conclusion

अगर आप भी अपने शरीर को संतुलित बनाना चाहते हैं तो आपको भी अपने दैनिक जीवन में रोजाना वृक्षासन को करना चाहिए क्योंकि इसके बहुत सारे बेनिफिट है।

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